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Showing posts from February, 2021

#बेरोजगार को रोज़गार दो!

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  बेरोजगार को रोज़गार दो,और न अबकुछ बोलो तुम। याद करो हर भाषण अपना,ख़ुद को अब तो तोलो तुम।। रोज नयी शिलान्यास और नई योजना न खोलो तुम। युवाओं का देश है प्यारे,युवा बन अब सोचो तुम।।१ योगी- मोदी जपते जपते हर युवा बेहाल हुआ। मिला न अबतक हमको कुछ भी,सच ख्याली पुलाव रहा।। दुल्हन सी सजवा मेनिफेस्टो का बस  परचार किया। हिंदी का प्रशिद्ध मुहावरा,लगता है बस नारा हुआ।।२ जब -जब सत्ता बुझ-सी जाती,जनता तो ही सुलगाती । वादे से तुम रोज मुकरते,सच से हो क्यों घबराते।। Ctet,uptet निकला है,उलझा अपना अधिकार कहीं। कर्तव्यों के बाद मांगते,हैं अपना अधिकार वही।।३

#कुछ अच्छा नही लगता!

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  💐💐जन्मदिवस के अवसर पर मनोभाव💐 ख़ुद से ख़ुद का जन्मदिवस मनाएँ ,कुछ अच्छा नही लगता। हम भी हो जाएं शामिल नादानों में,कुछ अच्छा नही लगता।।१ ख़ूब छुपाया है मैंने,सतीर्थ्यों*  से अपना जन्मदिन । इक बार इत्तला करदूँ,मग़र अच्छा नही लगता।।२    चाहता मैं भी हूँ मिले उपहार,कुछ मन कुछ बेमन से। बरस में मने इक बार ही त्यौहार, कुछ अच्छा नही लगता।।३ कुछ दोस्त साल में दो,चार,पांच भी मना लेते हैं। मग़र ठहरे हम कि, इक बार भी अच्छा नही लगता।।४

#इज्ज़त#

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  भला कौन नही चाहता इज्ज़त ! जैसे-दो मजदूर पति-पत्नी ;घर,बच्चे छोड़ निकल जाते हैं। दूर -दराज काम की तलाश में। एक साथ खोदते और पाटते हैं मिट्टी । और साथ ही चबाते  हैं,गुटखा,तम्बाकू। आज नया साल है,मग़र जेब में मौन चिल्लर हैं। मजदूरी पड़ी है ढेकेदार के जेब में,हिचकिचाहट है ;मांगने में ? मग़र माँगना पड़ा, अपने खातिर नही ,बच्चों के ख़ातिर। पति ने कहा: तुम कहो? पत्नी  ने कहा:तुम कहो? अंततः अबला,भीरु कही जाने वाली स्त्री ने सकुचाते हुये कहा: मालिक गर कुछ मिल जाता तो.... मालिक ने गम्भीर गर्जनध्वनि में कहा: कहीं भागे थोड़ी जा रहे हैं !  अगली सुबह सूरज तो निकला, मग़र मजदूर दम्पत्ति नही  निकले! मालिक को पता चल चुका था ;भला कौन नही चाहता इज्ज़त!