#इज्ज़त#
भला कौन नही चाहता इज्ज़त !
जैसे-दो मजदूर पति-पत्नी ;घर,बच्चे छोड़ निकल जाते हैं।
दूर -दराज काम की तलाश में।
एक साथ खोदते और पाटते हैं मिट्टी ।
और साथ ही चबाते हैं,गुटखा,तम्बाकू।
आज नया साल है,मग़र जेब में मौन चिल्लर हैं।
मजदूरी पड़ी है ढेकेदार के जेब में,हिचकिचाहट है ;मांगने में ?
मग़र माँगना पड़ा, अपने खातिर नही ,बच्चों के ख़ातिर।
पति ने कहा: तुम कहो? पत्नी ने कहा:तुम कहो?
अंततः अबला,भीरु कही जाने वाली स्त्री ने सकुचाते हुये कहा:
मालिक गर कुछ मिल जाता तो....
मालिक ने गम्भीर गर्जनध्वनि में कहा: कहीं भागे थोड़ी जा रहे हैं !
अगली सुबह सूरज तो निकला, मग़र मजदूर दम्पत्ति नही निकले!
मालिक को पता चल चुका था ;भला कौन नही चाहता इज्ज़त!

सुंदर
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