//भांजी के नाम छोटे मामा का पत्र//


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प्रिय भांजी


प्रिय भांजी,

शुरुआत अपने क्षणिक दुःख और तुम्हारे  अनन्त सुख से करता हूँ। आज !मतलब 24/08/2020 को मेरा net का exam था ,जो मेरी ही लापरवाही के कारण नही दे पाया,खैर कोई भी परीक्षा, हमारी पूरी जिंदगी तय नही करती ,फिर भी कुछ पल के लिए दुःखित तो कर ही देती है,इसीलिए मैं भी ;कुछ दुःखी था।

दुख का कारण ये कतई नही था कि ,परीक्षा छूट गई;बल्कि यह था कि dacument गुम हो गए,और इन्हें बनबाने में इतना ही दुःख ,फिर होगा..ख़ैर अपनी गम-शाद की कहानी छोड़,कुछ तुम्हारे बारे में लिखता हूँ,क्यूंकि..आज का दिन मतलब 25/08/2020 को तुम्हारा "अवतरण-दिवस" है ।(Birthday)है।

(ठीक 12:20 मध्यान्ह काल,अधिक आश्विन मास,शुक्ल पक्ष,दक्षिणायन (पुरुषोत्तम मास,दिन-शुक्रवार,नक्षत्र-पूर्वाषाढ़ का चौथा चरण,शोभन योग। राशि-धनु राशि अक्षर-ढ)

हम सभी खा-पीकर आराम ही कर रहे थे कि,सोहर  मण्डली की स्वर कोकिला हमारी अन्नू मौसी और तुम्हारी नानी की आवाज ,मेरे कान से होती हुई,मन मस्तिष्क को जागृत कर दिया;जिससे मुझे  अपने समय से पहले ही,जागना पड़ा।अधजगा ही सा था कि,कुछ शब्द सुनाई पड़े-"आज घर नतिनी भईं हों" मतलब साफ था,फिर भी एक बार फिर कान -देकर सुना ! नतिनी,मतलब लड़की हुई है!

"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता"

फिर भी हम भारतीय,आज भी पहली संतान लड़का ही चाहते हैं।भले ही वह बालक,आगे चल कर कंस,और रावण बनकर अपनी लंका,स्वयं ढहा दे।

कहने का मतलब ये बिल्कुल नही है कि, लड़की आगे चलकर ताड़का और सूर्पनखा नही बन सकती,अपितु ये है कि -

ईश्वर का प्रसादरूपी का या की दोनों का स्वागत होना चाहिये।

शहर में तुम्हारा जन्म जरूर हुआ,मग़र रौनक गाँव तक फैली है,आज दोनों खेमे में ,खुशी की लहर है,मतलब,गांव और शहर दोनों की आनन्दित हैं। नानी-नाना और दादा-दादी दोनों के घर दिवाली से कम उत्सव नही है।

जब कभी भी ये ब्लॉग पढ़ोगी, अच्छा महसूस करोगी, तब सायद ,मेरे बारे में जानने की कोशिश करोगी;मग़र उस वक़्त मैं तुम्हें सायद ही गूगल  सर्च करने पर ,मिल पाऊं;मग़र तुम्हारी मम्मा ,मेरे बारे में सबकुछ और मैं उनके बारे में सबकुछ जानता हूँ।तुम्हें भी सबकुछ पता चल जाएगा।

लिखने को बहुत सी बातें हैं ,मगर मैं अभी बेरोजगार हूँ इसलिए ज्यादा ज्ञान बांटने से डरता हूँ।खैर, पहली और अंतिम बात बताता चलूं कि, जब भी तुम्हारा अपनी नानी के घर आना हुआ तो,अपनी मम्मा से छुआ-छूट की शिक्षा लेके आना,वरना हो सकता है,उल्टे पांव फिर लौटना पडे,तुम्हें अपने शहर की ओर।और हां,तुम्हारे अवतरण की ख़ुशी में,मझले मामा, मतलब सेकेटरी साहब ने 3 डिब्बे मिठाइयां लाकर रखीं हैं, अब बस सुबह का इन्तजार है,की कब देवी मां को भोग लगे,और हमारा भी भोग लगे।

 "अग्रिम जन्मदिवस की आकाशभर शुभकामनाएँ"

                                                                   तुम्हारा मामा

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