Short story -गुमसुम बच्ची

                                 गुमसुम बच्ची -







 कृष्णवर्णाचहरा ,पतला शरीर ,लड़ती-झगड़ती चीखती-चिल्लाती लड़की थी अमृता ।

जब कोई हमारी सुनने वाला नहीं होता ,तो भी इंसान इस रूप को  धारण कर लेता है ।

पहले पहले जवाब नहीं देती थी; पर धीरे-धीरे बदलाव शुरू हो गया 

एक दिन पूछा उसने सर शांत कैसे रहें ?

जैसे आप रहते हैं !

मैंने  बताया यह कोई बीमारी थोड़ी है ,मैं भी खूब बचपन में गुस्सा करता था, हंसता था,रोता था !

यह तो बच्चा होने की निशानी है !

मैं नहीं चाहता था ;बच्ची का बचपन छीन लिया जए

बस उसके चेहरे पर हंसी होती है, खूब प्रश्न होते हैं, कभी-कभी प्रश्नों से अवाक कर देती है ।

उसका एक प्रश्न याद है -अंबेडकर की तरह ,राम ने हमको क्या दिया है ?

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