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Showing posts from September, 2020

//भांजी के नाम छोटे मामा का पत्र//

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💐💐💐                                                💐💐💐 प्रिय भांजी, शुरुआत अपने क्षणिक दुःख और तुम्हारे  अनन्त सुख से करता हूँ। आज !मतलब 24/08/2020 को मेरा net का exam था ,जो मेरी ही लापरवाही के कारण नही दे पाया,खैर कोई भी परीक्षा, हमारी पूरी जिंदगी तय नही करती ,फिर भी कुछ पल के लिए दुःखित तो कर ही देती है,इसीलिए मैं भी ;कुछ दुःखी था। दुख का कारण ये कतई नही था कि ,परीक्षा छूट गई;बल्कि यह था कि dacument गुम हो गए,और इन्हें बनबाने में इतना ही दुःख ,फिर होगा..ख़ैर अपनी गम-शाद की कहानी छोड़,कुछ तुम्हारे बारे में लिखता हूँ,क्यूंकि..आज का दिन मतलब 25/08/2020 को तुम्हारा "अवतरण-दिवस" है ।(Birthday)है। ( ठीक 12:20 मध्यान्ह काल,अधिक आश्विन मास,शुक्ल पक्ष,दक्षिणायन (पुरुषोत्तम मास,दिन-शुक्रवार,नक्षत्र-पूर्वाषाढ़ का चौथा चरण,शोभन योग। राशि-धनु राशि अक्षर-ढ) हम सभी खा-पीकर आराम ही कर रहे थे कि,सोहर  मण्डली की स्वर कोकिला हमारी अन्नू मौसी और तुम्हारी नानी की आवाज ,मेरे...

//हाईब्रिड इंसान//

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           ////💐💐💐लघुकथा💐💐💐/// आज सुबह रोज की तरह, सूरज की किरणों को मात देता हुआ उठा;और हाँथ में ब्रश लेकर दम तोड़ते हुए पेस्ट को, निकालने की जद्दोजहद करता हुआ,घर के पूर्वी दरवाजे से निकलकर भिंडी के पौंधों के पास आ बैठा।  कुछ दिन पहले हि लगाए हुए, भिंडी के पौधे ,फलों के साथ प्रसन्न दिख रहे थे।कई दिनों से जब-जब भी इन पौधों को निहारता तो ,कई जिज्ञासायें प्रश्न बनकर सामने खड़ी हो जाती हैं। जैसे- अगर हम मानव भी हाईब्रिड हो जाएं,तो एक बच्चा जो रोते हुये स्कूल जाता है,सायद फिर जाने की जरूरत न पड़े।एक लड़की जिसका विवाह इस लिए नही हो रहा, क्योंकि वो इंग्लिश नही जानती,फिर सायद किसी की भी सादी ऐसे नही रुकेगी।इसी तरह कोटा में पढ़ने वाले लड़के ,दर्जनों की तादाद में मृत्यु का वरण नही करेंगे ;और जिन लड़कों को स्कूलरूपी मंदिर से नफरत हो जाती है वो सायद प्रेम में परिवर्तन हो जाये। वर्षाती मेढकों की तरह ,अब मैं ख़ुद को पत्रकार मान भिंडीभवन  में पहुंचकर, सबका साक्षत्कार लेने को तैयार था। सवाल- ए-जवाब कुछ  कुछ इस प्रकार था- 1.एक पौथा जो सबसे छोटा ,मग़र सबसे ज्याद...

💐शिक्षक दिवस 💐

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 💐आदरणीय सुमन सर,💐 सुरुआत अपने शेर से करता हूँ कि - शिक्षक बनना बड़ा सरल है,अध्यापन करना बड़ा कठिन है। जीवन पाना बड़ा सरल है,जीवन जीना बड़ा कठिन है।। कहने का मतलब इतना है कि हमारे जीवन मे कई शिक्षक आते हैं और चले जाते हैं, मग़र कुछ एक ही शिक्षक दिल-ए-दिवार पर देवताओं की तरह रह पाते हैं।मैं जब कक्षा 12 में पढ़ रहा था तब की एक घटना ,मेरे अंदर छुपे कविता के नाद को धरातल पर लाने का काम किया था।बात कुछ यूं थी कि ,2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर स्वरचित कविता का पाठ कराया गया,जो पहला अवसर था,जो हममे से न जाने कितने छात्रों का स्वयं से परिचय हुआ था। जितना ही 24 घण्टे का समय कम था और उतना ही  गांधी जैसे व्यक्तित्व पर कुछ लिखना पाना कठिन  था। फिर भी कुछ न कुछ  तो लिखना ही था।पहले तो ये ख्याल आया कि चलो कहीं से छाप लिया जाए,मग़र ये अच्छे से पता था कि कंकड़ और पत्थर का पहचान हमारे प्रिय सुमन सर को था। "मतलब हमारा लिखना कंकड़  और किसी कवि का छापना पत्थर था" खैर फिर भी रात भर जागरण के बाद ,कहीं जाकर चार पांच लाइनों का मुक्तक लिखने में सफ़ल हो गया।जो कुछ इस तरह से है- "गांधी केवल...