//हाईब्रिड इंसान//

           ////💐💐💐लघुकथा💐💐💐///


आज सुबह रोज की तरह, सूरज की किरणों को मात देता हुआ उठा;और हाँथ में ब्रश लेकर दम तोड़ते हुए पेस्ट को, निकालने की जद्दोजहद करता हुआ,घर के पूर्वी दरवाजे से निकलकर भिंडी के पौंधों के पास आ बैठा। 

कुछ दिन पहले हि लगाए हुए, भिंडी के पौधे ,फलों के साथ प्रसन्न दिख रहे थे।कई दिनों से जब-जब भी इन पौधों को निहारता तो ,कई जिज्ञासायें प्रश्न बनकर सामने खड़ी हो जाती हैं।

जैसे- अगर हम मानव भी हाईब्रिड हो जाएं,तो एक बच्चा जो रोते हुये स्कूल जाता है,सायद फिर जाने की जरूरत न पड़े।एक लड़की जिसका विवाह इस लिए नही हो रहा, क्योंकि वो इंग्लिश नही जानती,फिर सायद किसी की भी सादी ऐसे नही रुकेगी।इसी तरह कोटा में पढ़ने वाले लड़के ,दर्जनों की तादाद में मृत्यु का वरण नही करेंगे ;और जिन लड़कों को स्कूलरूपी मंदिर से नफरत हो जाती है वो सायद प्रेम में परिवर्तन हो जाये।

वर्षाती मेढकों की तरह ,अब मैं ख़ुद को पत्रकार मान भिंडीभवन  में पहुंचकर, सबका साक्षत्कार लेने को तैयार था।

सवाल- ए-जवाब कुछ  कुछ इस प्रकार था-

1.एक पौथा जो सबसे छोटा ,मग़र सबसे ज्यादा फलदार ,उससे पूंछा-आप सब खुश तो बहुत होंगे,जो कम समय में अधिक सफलता पाकर ?

उ. एक ने कुछ उदास हो कर कहा-"जिनका बचपन छिन जाए,उसकी जवानी बस दूसरों को ही अच्छी लगती है।

2.दूसरे से पूँछा- जो  थोड़ी बडी और कम फलदार भिंडी थी- आप लोगों को देखकर हम इंसान भी प्रेरित होते हैं ?

उ.एक ने कहा- प्रेरित किसी से भी हुआ जा सकता है,मग़र प्रेरणा की दिशा सही हो जरूरी नही।

मेरे जहन में अब भी बहुत से प्रश्न तैयार थे,मग़र इन दो उत्तरों ने सभी प्रश्नों का समाधान कर,अंदर पल रहे हाईब्रिड इंसान बनने का भ्रम सूरज के अस्ताचल की तरह अस्त कर दिया था।



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