शिक्षा जरूरी या धर्म जरूरी
अपना अवगुण नहीं देखता,अज़ब जगत का हाल। निज आँखों से नही सूझता,सच है अपना भाल।। आज एक मुद्दा राष्टीय मुद्दा बन चुका है,जिस पर अगर बात न की जाये तो बहुत लोग अपने सच से रूबरू नही हो पाएंगे। इस लेख में एक मुद्दा जाति का है,दूसरा धर्म का है,एक शिक्षा का है,एक अहम का है,आज भी भारत का एक वर्ग जाति को लेकर जी रहा है,कुछ धर्म का सहारा ले जी रहें हैं,कुछ शिक्षा को लेकर,विगत 15 दिनों से अनवरत चल रहा धरना ,जो की काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृतविद्याधर्मविजनसंकाय के छात्रों द्वारा फ़िरोज खान नामक व्यक्ति की नियुक्ति का बहिष्कार किया जा रहा है। बहिष्कार का कारण क्या है ये जानना अतीव आवश्यक है।अभी तक इसका निराकरण भी नही हुआ है।जिसका जिम्मेदार अनुमानत: तत्कालीन सरकार और काशी हिंदू विश्वविद्यालय प्रशासन है। कुछ प्रश्न जहन में उठते हैं जो निम्न प्रकार है ? क्या मुस्लिम जाति के कारण विरोध हो रहा या धाधली का आरोप विरोध का कारण है ।अथवा सनातन धर्मावलंबियों को सनातन धर्म संकुचित होने का डर है। जो भी हो विषयगत शिक्षा देने के लिए एक मात्र विषयगत योग्यता की आवश्यकता होती है ,...