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//भगवती-भजन (सवैया छंद)में

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                                    ( 1) विष्णु की माया विंध्यवासिनी,दुःखियों का दुःख दूर करें हैं। तापत्रय का नाश करें और,सुखसागर संचार करें हैं।। काली-कराली खप्परवाली,सर्जन,पालन,संघार करें हैं। भाव की भूखीं हैं जगदम्बे,माँ जगतारिणी रूप धरीं हैं।।                               ( 2) देख तुम्हारी मोहनी-मूरत,लोचन धन्य आज भए हैं। मायाजग को निहारत देखत्,दुःखों के अम्बार लगे हैं।। सारे जग के पदारथ दूषित,निर्मल मन से भोग रचे हैं। मानव तन गर भक्ति भई ना, जीवन समझो व्यर्थ भयो हां।।                                   (3) बचपन बीता खेलत -खात्,जवानी दु:स्प्नों में बीती। मौत से बदतर आया बुढ़ापा, राम रमे न चिन्ता व्यापी।। काम न छूटा,क्रोध न छूटा, लोभ न छूटा, देह छुटा है। जीवन क्षणभंगुर है बीता,जगतारिणी हर स्वास भजो रे।।

//हाथरस//विनम्र श्रद्धांजली

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                         ///शोक- गीत///// भावी -भारत का युवा ,कहाँ  जा रहा।                     काले-बादल घनेरे ,यहाँ छा रहे ।।                  जो हुआ हाथरस* में ,हुआ क्या सही।                    लहू आज पानी, बन बहा जा रहा।।1         आज शासन-प्रशासन, जनभक्षक हुआ।          घोरकृत्य का भी ,पूरा समर्थक हुआ।।           गर निकल जाता सूरज,घनी रात में।।          कुछ मिल जाती शान्ति,लगी आग में।।2 एक बुनियादी रस्ता,अब हमें चाहिए। खोखली मैकाले- शिक्षा ,नही चाहिए।। पाठ्यक्रम गर बने ,देवभाषा कहीं।। ऐसे बलात्कारी कभी,पैदा होंगे नही।।3                   पशु भी ऐसे धृणित कृत्य ,करते नही।                   ...