////माँ के रूठने पर लिखा गया गीत///
चुपचाप रहो न, अब कुछ बोलो तुम।
दीवार ढली है जो रिश्तों की ,अब मत तोड़ो तुम।।1
क्या सच है क्या ग़लत किया, ख़ुद ही सोचो तुम।
मौन से बेहतर बड़बड़ करते,खुश रहना तुम।।2
वन वन भटकी बन बैरागन,सीता को विस्मृत न करना तुम।
पतिप्रीत में प्रेम निभाने,हर क्षण क्षण कुछ न कुछ करना तुम।।3
माँ रूठी है कब बच्चों से,क्या समझायें अब तुमको हम।
नौ नौ माह भार को ढोये,अब क्यों जीवन भार लगे हम।।4
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