भजन-प्रभू तुम्हारे आज सामने खड़ा हूँ मैं याचक बनके


प्रभू तुम्हारे आज सामने,खड़ा हूँ मैं याचक बनके।
दे देना मुझको भक्ति,और न हो कहीं अनुरक्ति।।1

मूढ़ ,अज्ञ प्राणी मैं स्वामी,तुम हो समरथ घतवासी।
नर की सेवा करते करते,मिल जायेंगे वैकुंठवासी।।2

बीत रहा जीवन क्षणभंगुर,पता नही क्या कल होगा।
करले भजन मुरलीधर का,सोच न पगले अब कल का।।3

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