कोरोना उन्मूलक- भजन
करो किरीटी कोरोना मुक्ति,नही है सामर्थ्य शिवा तुम्हारे।
पिया गरल था जगत के रक्षण,न कोई हेतू तुम्हारा शिव था।।
कहाँ तलक हम तुम्हें सुनाएं, तुम्हारे उपकार का लेखा-जोखा।
करो जो नर्तन हो नाद ऐसी,मिले कोरोना से सबको मुक्ति।
धरा की है ये पवित्र भूमि, जहां नटनागर ने वेणू बजाई।।
नटराज हो तुम नट हम हैं सारे,सुन ली अरज न लगाओ देरी।
देखी न विपदा किसी ने ऐसी,जगत्पिता अब हरो विपत्ति।।
सपथ षड़ानन गणनाथ की है,समझ लो युक्ति न कोई अब है।।
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