पिताजी की कहने पर (यजमान वृद्धि प्रार्थना) /
जब तक रहे खुसबू सुमन में,यजमान भी महकता रहे।
महकता रहे महकता रहे ,यजमान भी महकता रहे।।1
बसन्त हो घरबार उसका,जीवन हो गुलज़ार उसका।
नित नई खुशियाँ बिखेरे,ऐसा सुधड़ परिवार हो।।2
जब तक त्रिशूल पे काशी नगरी टिकी रहे।
तब तक यजमान की सन्तति बढ़ती रहे।।3
जबतक धरा पे अविरल गङ्गा बहती रहे।
तबतक धरा पे यजमान की जयकार होती रहे।।4
जबतक चरणरज विप्र के, शिर पर चढ़ती रहे।
तबतक जहां में यजमान नितिनई वृद्धि करे।।5
जब तक अवनि पर व्योम की छाया पड़ती रहे।
तब तक यजमान भी विप्रों तले विश्राम ले।।6
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