#चरैवेति चरैवेति चरैवेति चरैवेति
चरैवेति चरैवेति चरैवेति चरैवेति ।
होगी होगी होगी होगी जीत तेरी होगी।।।
गुनगुना गुना गुना गुना तू चरैवेति।।
घोल घोल घोल घोल महाध्वनी गीति।।
चल रहा है सूर्य जैसे तू भी अब तो चलना।
बह रही पवन है जैसे तू भी अब तो बहना।।
तप रहा है अग्नि जैसे तू भी अब तो तपना।।
होगा जो कमजोर तू कोई साथ न तेरा देगा।
राह में पड़े कंकरों सा लात मार देगा।।
बन विशाल चटटान तू जो हौसला चीर दे।
उड़ उड़ा उड़ा उड़ा यज की बन धूम तू।।

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